Varanasi news विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती,मानव जीवन को ज्ञान से करती है प्रकाशित; अशोक विश्वकर्मा

वाराणसी

देवी सरस्वती ज्ञान, बुद्धि, संगीत, कला और विद्या की प्रतीक हैं, जिन्हें ब्रह्मा की पत्नी और त्रिदेवी लक्ष्मी और पार्वती का हिस्सा माना जाता है, जो श्वेत कमल पर विराजमान, वीणा, पुस्तक, माला और अक्षमाला धारण करती हैं।भारतवर्ष में वसंत पंचमी पर इनकी विशेष पूजा होती है। वह श्वेत वस्त्र धारण करने वाली निर्मल और शांत स्वरूपा हैं। जो ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक है।उनके चार हाथ हैं एक में वीणा संगीत व कला का प्रतीक दूसरे हाथ में,पुस्तक ज्ञान, एवं माला,एकाग्रता, और अक्षमाला, अक्षय ज्ञान प्रतीक है। उनका वाहन हंस है, जो विवेक और सत्य-असत्य में भेद करने की क्षमता का प्रतीक है।देवी सरस्वती श्वेत कमल पर विराजमान हैं,वह सभी प्रकार के ज्ञान, विद्या, बुद्धि और रचनात्मकता की अधिष्ठात्री देवी हैं और सृष्टि के देवता ब्रह्मा की दिव्य पत्नी के रूप में पूजित है। वह ज्ञान के संचार और सृष्टि के कार्यों में ब्रह्मा जी की सहायक हैं। लक्ष्मी और पार्वती के साथ, वे त्रिदेवियों में से एक हैं, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं सरस्वती – ज्ञान, लक्ष्मी – धन, पार्वती – शक्ति का प्रतीक है। यह वाणी की देवी वाग्देवी के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। जो बोलने की क्षमता प्रदान करती हैं। बसंत पंचमी भारतवर्ष का प्रमुख त्योहार है, जो माघ माह में (जनवरी-फरवरी) में मनाया जाता है। इस दिन बच्चों को अक्षर ज्ञान कराना शुभ माना जाता है। विद्यार्थी और ज्ञान साधक उनकी पूजा करते हैं ताकि उन्हें एकाग्रता और सफलता प्राप्त हो। उन्हें शारदा, ब्राह्मणी, ब्राह्मी, विद्‌धदात्री (ज्ञान देने वाली), वाग्देवी (वाणी की देवी), और भारती जैसे कई नामों से भी जाना जाता है। देवी सरस्वती श्वेत और प्रीत वस्त्र इसलिए धारण करती है क्योंकि सफेद रंग पवित्रता शांति और सत्व गुण का प्रतीक है, जो अज्ञानता को दूर कर शक्ति देता है। जबकि पीला रंग ज्ञान बुद्धि ऊर्जा खुशी और बसंत ऋतु का प्रतीक है। जो ज्ञानोदय और नई शुरुआत को दर्शाता है दोनों रंग मिलकर प्रकृति की दिव्यता और ज्ञान के प्रकाश को उजागर करते हैं। देवी सरस्वती के पूजन की परंपरा वैदिक काल में लगभग 1500 से 500 ईसा पूर्व आरंभ हुई। वैदिक काल में लिखित ऋग्वेद में देवी सरस्वती का उल्लेख विद्या, वाणी और संगीत की देवी के रूप में मिलता है। मानव जीवन को ज्ञान से प्रकाशमान करने वाली देवी सरस्वती को नमन है।