वाराणसी

माघ मेला प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को पहले गंगा स्नान से रोका गया, जो सनातन परंपराओं पर सीधा आघात है। शंकराचार्य जी द्वारा इस अन्यायपूर्ण निर्णय के विरोध में धरने पर बैठने के बाद, वर्तमान सरकार ने और अधिक दमनात्मक रवैया अपनाते हुए उन्हें माघ मेला से प्रतिबंधित करने तथा उनके शिविर को मिलने वाली आवश्यक सुविधाओं पर रोक लगाने संबंधी नोटिस जारी कर दिया।
यह घटनाक्रम न केवल धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, बल्कि सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु के सम्मान पर भी कुठाराघात है। सनातन परंपरा में शंकराचार्य का गंगा स्नान आस्था और धर्म का विषय है, उसे रोकना पाप के समान है।
इसी अलोकतांत्रिक और तानाशाही रवैये के विरोध में समाजवादी पार्टी की ओर से वाराणसी के सामने घाट पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया। मां गंगा की गोद में उतरकर गंगा तट पर विरोध दर्ज कराया गया और यह संदेश दिया गया कि सनातन धर्म के नाम पर दिखावा करने वाली सरकार की सच्चाई अब जनता के सामने आ चुकी है।
प्रदर्शन का नेतृत्व अमन यादव, महानगर अध्यक्ष, बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी ने किया। अमन यादव ने कहा कि सरकार पहले शंकराचार्य जी को स्नान से रोकती है, फिर उनके धरने के बाद नोटिस जारी कर उन्हें माघ मेला से बाहर करने की कोशिश करती है, जो पूरी तरह असंवैधानिक और निंदनीय है। योगी आदित्यनाथ सरकार को तत्काल यह नोटिस वापस लेना चाहिए और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
इस विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से राधेश्याम यादव, बाबू भारती, अमन कुमार उमेश राजभर सहित समाजवादी पार्टी एवं बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





