वाराणसी

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा है कि भाजपा क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व को खत्म करके पूरे देश में अपना राजनीतिक एकाधिकार, विचारधारा और वर्चस्व स्थापित करना चाहती है। भाजपा की विस्तारवादी राजनीतिक रणनीति क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व को खत्म करने की खतरनाक चाल है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करके इसकी शुरुआत की, लेकिन बाद में बहुमत हासिल कर क्षेत्रीय सहयोगियों को दरकिनार कर दिया या उनके जनाधार को अपने पाले में कर लिया। इतना ही नहीं भाजपा केंद्रीय एजेंसियों जैसे ED, CBI का इस्तेमाल करके क्षेत्रीय नेताओं पर दबाव बनाती है और उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने को मजबूर कर देती है। भाजपा भले ही राष्ट्रीय स्तर की पार्टी हो, लेकिन केंद्र में सरकार चलाने के लिए उसे एनडीए (NDA) के रूप में क्षेत्रीय दलों का समर्थन है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा रणनीतिक रूप से पूरे देश में क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व को समाप्त करके उन्हें एनडीए का हिस्सा बनाकर अपने विस्तार के लिए उपयोग करना चाहती है। महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी में हुई टूट इसी रणनीति का हिस्सा है। इसके अलावा अकाली दल और बीजू जनता दल जैसे पुराने सहयोगियों के कमजोर होने के पीछे भी भाजपा की विस्तारवादी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। दिल्ली और बंगाल में भी भाजपा ने यही किया। क्षेत्रीय दलों का भाजपा के साथ गठबंधन खुद को बचाने या सत्ता में बने रहने के लिए किया गया मजबूरी का सौदा है। जैसे बिहार में जनता दल यूनाइटेड और आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी इसके उदाहरण है, ऐसे गठबंधनों में जूनियर पार्टनर बनने से क्षेत्रीय दलों की अपनी स्वतंत्र पहचान और प्रभाव खत्म हो जाती है। हाल के वर्षों में कई प्रमुख क्षेत्रीय दलों जैसे शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में भी यही देखने को मिला है। जिसमें एक धड़ा भाजपा के साथ जुड़ गया और क्षेत्रीय दलों का पूरी तरह सफाया हो गया। क्षेत्रीय दल अपने अस्तित्व को बचाने के लिए भारी दबाव में है और उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति के अनुसार खुद को ढालना पड़ रहा है। तोड़ो और राज करो की रणनीति तथा नेताओं के दल बदल ने कई क्षेत्रीय दलों के मुख्य आधार को कमजोर किया है।




