Varanasi news:सरकार के गलत फैसलों के विरोध में नारे लगाना नागरिकों का संवैधानिक हक: राष्ट्रीय अध्यक्ष

वाराणसी

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि सरकार गलत फैसलों का विरोध करने वाले नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को खत्म करके देश को गुलाम बनाना चहती है। उन्होंने कहा कि अमित शाह या बीजेपी मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने पर मुंबई पुलिस द्वारा सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के नेता शाहिद अहमद के खिलाफ किए गए कार्यवाही को बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस माधव जामदार ने रद्द करते हुए कहा सरकार के किसी गलत फैसले का विरोध करना तथा किसी राजनेता या पार्टी के खिलाफ नारा लगाना नागरिकों का संवैधानिक मौलिक अधिकार है।
बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जस्टिस माधव जामदार ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस सिर्फ इसलिए लोगों को उनको शहर से नहीं निकाल सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है,या फिर सरकार के खिलाफ नारे लगाए हैं। जस्टिस जामदार ने कहा विरोध करना नागरिकों का अधिकार है. याचिकाकर्ता ने ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’, ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए हैं. नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए शहर से निकालने का ऑर्डर क्यों? बॉम्बे हाई कोर्ट में राजनीतिक कार्यकर्ता सईद अहमद अब्दुल वहीद की याचिका पर सुनवाई हो रही थी. उनको मुंबई पुलिस ने साल भर के लिए शहर से दरबदर करने का फैसला किया था. जस्टिस माधव जामदार ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है. वे विरोध नहीं कर सकते, वे आंदोलन नहीं कर सकते, यह सब क्या है? अब इतने पेपर लीक हो गए हैं. अगर लोग विरोध करेंगे तो क्या आप केस कर देंगे? पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की नौकर नहीं है. वे पब्लिक सर्वेंट हैं. मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगा रहा हूं. जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि सरकार के फैसलों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना किसी व्यक्ति को शहर से निकालने का आधार नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अपनी बात कहने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है. कोर्ट ने माना कि पुलिस का यह कदम नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अनुच्छेद 19 और सम्मान के साथ जीने के अधिकार अनुच्छेद 21 का सीधा उल्लंघन है, इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सईद अहमद के खिलाफ जारी एक साल के शहर निकाला के आदेश को रद्द कर दिया।