Varanasi news:श्री कृष्ण जन्मोत्सव अधर्म, और अन्याय के विरुद्ध धर्म की स्थापना का प्रतीक, अशोक विश्वकर्मा

वाराणसी

श्री कृष्ण का जन्मोत्सव अधर्म पर धर्म की विजय का पवित्र पर्व है। भगवान कृष्ण को विष्णु जी का आठवां अवतार माना जाता है। इनका जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में मध्य रात्रि में हुआ था। बालकृष्ण की लीलाएं समाज में प्रेम, भाईचारा और आनंद का संदेश देती हैं। कृष्ण ने महाभारत काल में गीता का उपदेश देकर मानवता को कर्तव्य और कर्म का मार्ग दिखाया। इस पर्व को गोकुलाष्टमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और रोहिणी अष्टमी के नामों से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार श्री कृष्ण जन्म के समय कारागार के सारे ताले अपने आप खुल गए थे। यह उत्सव महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में कृष्ण की बाल लीलाओं (माखन चोरी) की याद में मनाया जाता है। जन्माष्टमी के ठीक अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाता है, जो नंद बाबा और यशोदा के यहाँ कृष्ण के जन्म की खुशी का प्रतीक है। द्वापर युग में मथुरा के राजा उग्रसेन का पुत्र कंस बेहद अत्याचारी था। कंस ने अपने पिता को गद्दी से हटाकर मथुरा पर अधिकार कर लिया और प्रजा पर अत्याचार करने लगा। हालांकि, अपनी बहन देवकी से वह बहुत प्रेम करता था, लेकिन उसी प्रिय बहन को कंस ने बहुत कष्ट भी दिए। देवकी का विवाह यदुवंशी सरदार वसुदेव से हुआ था। बड़े अरमानों से कंस ने देवकी का विवाह कराया। विवाह के उपरांत कंस स्वयं देवकी और वसुदेव को उनके घर पहुंचाने के लिए रथ लेकर निकला। तभी आकाशवाणी हुई कि जिस बहन को वह इतने प्रेम से विदा कर रहा है, उसी की आठवीं संतान कंस के वध का कारण बनेगी। यह सुनकर कंस क्रोधित हो गया और वसुदेव को मारने के लिए आगे बढ़ा।तब देवकी ने कंस से वसुदेव का जीवन बख्शने की विनती की और वचन दिया कि उनकी जो भी संतान होगी, उसे वह कंस को सौंप देंगी। कंस ने अपनी बहन की बात मान ली, लेकिन देवकी और वसुदेव दोनों को कारागार में बंद कर दिया। देवकी और वसुदेव की 7 संतानें हुईं और एक-एक करके उनके मामा कंस ने जन्म लेते ही उन सभी नवजातों की हत्या कर दी। आठवीं संतान के जन्म का समय आया तो कारागार की सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई। इसी दौरान गोकुल में नंद की पत्नी यशोदा भी संतान को जन्म देने वाली थीं। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात को देवकी ने भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण को जन्म दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार उस समय भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में देवकी और वसुदेव के सामने प्रकट हुए। उन्होंने बताया कि वे मानव रूप में अवतार लेकर कंस के अत्याचार का अंत करने आए हैं और वसुदेव से उन्हें गोकुल में नंद-यशोदा के पास छोड़ आने को कहा। इसके बाद भगवान ने नवजात शिशु का रूप धारण कर लिया। उसी समय कारागार के पहरेदार मूर्छित हो गए और उसके द्वार अपने आप खुल गए। वसुदेव बालक कृष्ण को सूप में रखकर गोकुल की ओर चल पड़े। भारी बारिश के चलते उस समय यमुना नदी उफान पर थी। वसुदेव जब बालक कृष्ण को लेकर यमुना में उतरे, तब भगवान के चरणों का स्पर्श होते ही यमुना का जल शांत हो गया और उनके लिए रास्ता बन गया। वसुदेव गोकुल पहुंचे और नंद के घर जाकर बालक कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया। इसके बदले वे यहां जन्मी कन्या को लेकर मथुरा के कारागार में लौट आए।श्रीकृष्ण ने अमीर-गरीब का भेद मिटाया। उन्होंने सुदामा जैसी मित्रता और सभी के साथ समान व्यवहार का संदेश दिया। भगवान कृष्ण का जन्म अत्याचार और अन्याय के प्रतीक कंस के विनाश के लिए हुआ था। यह हमें अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।