Chandauli news:DSR तकनीक से धान की खेती में नई उम्मीद, प्रति बीघा ₹3 हजार तक की बचत

धान के कटोरे में DSR विधि से लहलहा रहीं धान की फ़सल

चंदौली

जनपद के शहाबगंज ब्लॉक अंतर्गत ग्राम जंगलपुर एवं अमरसीपुर में बुधवार को जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव द्वारा डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) यानी सीधी बुवाई विधि से उगाई जा रही धान की फसलों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान DSR तकनीक से की गई खेती के परिणाम बेहद उत्साहजनक और प्रशासनिक दावों की पुष्टि करते पाए गए।

जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने स्थलीय भ्रमण के दौरान ग्राम जंगलपुर निवासी कृषक नागेंद्र सिंह के 40 बीघा तथा ग्राम अमरसीपुर निवासी बद्री प्रसाद यादव के 30 बीघा खेत में DSR विधि से बोई गई धान की फसल का जायजा लिया गया। वर्तमान में नागेंद्र सिंह की फसल लगभग 80 दिन और बद्री प्रसाद यादव की फसल 65 से 70 दिन की अवस्था में है। मौके पर दोनों ही खेतों में फसल पूरी तरह स्वस्थ पाई गई, जिसमें किसी भी प्रकार के कीट, रोग या खरपतवार का प्रकोप दर्ज नहीं किया गया।

निरीक्षण दल द्वारा फसल की गुणवत्ता और विकास को परखने के लिए प्रति हिल टिलर (कल्लों) की संख्या की गिनती की गई:
​ नागेंद्र सिंह (जंगलपुर): 28 से 57 टिलर प्रति हिल बद्री प्रसाद यादव (अमरसीपुर): 25 से 37 टिलर प्रति हिल प्रति बीघा 3,000 रुपये तक की बचत प्रगतिशील किसान नागेंद्र सिंह और बद्री प्रसाद यादव ने बताया कि पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में DSR विधि अपनाने से नर्सरी तैयार करने, लेबर (मजदूरी) और पानी की भारी बचत हो रही है। बुवाई और रोपाई के शुरुआती खर्च में ही प्रति बीघा न्यूनतम 3,000 रुपये की लागत कम आ रही है।

धान के कटोरे के रूप में विख्यात चंदौली जनपद में DSR तकनीक के ये सफल परिणाम अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। अधिकारियों ने दोनों किसानों की फसल की सराहना करते हुए जिले के अन्य कृषकों से भी जल और लागत की बचत करने वाली इस आधुनिक तकनीक को अपनाने की अपील की है।