Varanasi news:डॉ राम मनोहर लोहिया के विचार आर्थिक और राजनीतिक समानता के प्रेरणा स्रोत: अशोक विश्वकर्मा

वाराणसी

विश्वकर्मा महासभा ने लोहिया जी को जयंती पर किया याद

ऑल इंडिया यूनाइटेड
विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने समाजवादी नेता डॉ राम मनोहर लोहिया जी को जयंती पर याद करते हुए नमन और श्रद्धा सुमन अर्पित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया महान स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी विचारक और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक थे। उनके विचार “सप्त क्रान्ति जाति उन्मूलन, आर्थिक समानता, आरक्षण और सत्ता के विकेंद्रीकरण पर आधारित थे। वह “रोटी, कपड़ा और मकान” के साथ लोकतंत्र के हिमायती थे। लोहिया जी ने समाज के पुनर्गठन के लिए सात क्रांतियों का आह्वान किया, जिसमें स्त्री-पुरुष समानता, जाति आधारित असमानता का अंत, रंगभेद का विरोध, औपनिवेशिक शासन का अंत, आर्थिक समानता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अहिंसक जीवन शामिल था। लोहिया जी के समाजवाद की परिकल्पना में सिर्फ धन की समानता नहीं, बल्कि समानता के साथ-साथ ‘सम्मान’ की भी बात शामिल थी। वे बड़े उद्योगों के राष्ट्रीयकरण और स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों के माध्यम से आर्थिक विकेंद्रीकरण के समर्थक थे।
लोहिया जी का मानना था कि भारत में जाति प्रथा ही आर्थिक और सामाजिक असमानता का मुख्य कारण है। उन्होंने दलित, पिछड़ों और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए 60% फीसदी आरक्षण का सिद्धांत दिया। उन्होंने चौखंबा राज के सिद्धांत के तहत सत्ता को केंद्र, प्रांत, जिला और ग्राम स्तर तक बांटने की वकालत की, जिससे स्थानीय स्वशासन मजबूत हो सके। वह विश्व संसद के समर्थक थे ताकि वैश्विक समानता आ सके। उन्होंने प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों में अंग्रेजी के बजाय भारतीय भाषाओं के प्रयोग पर जोर दिया। वह राजनीति में ईमानदारी और सादगी के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था कि समाजवाद को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक न्याय से भी जोड़ा जाना चाहिए। लोहिया जी के विचार आज भी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं,