वाराणसी

ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा है कि गाजीपुर निशा विश्वकर्मा मौत प्रकरण ने उत्तर प्रदेश के जातीय राजनीतिक समीकरण को प्रभावित किया है। जिसके चलते सपा और भाजपा में विश्वकर्मा समाज के वोटो को साधने के लिए सर्वाधिक खलबली और बेचैनी बढ़ी है। उन्होंने कहा की इस प्रकरण के चलते भाजपा ने एक विश्वकर्मा को मंत्री बनाया और सपा मुखिया ने वोटो के समीकरण के लिए बयान दिया की राम आसरे जब-जब संघर्ष में आते हैं, सपा की सरकार बनती है। जबकि सत्यता इसके विपरीत है। सपा में रहते हुए राम आसरे ने समाज के किसी व्यक्ति को नेता नही बनने दिया। और जब-जब सपा की सरकार बनी समाज पर उत्पीड़न की घटनाएं बेतहाशा बढ़ी। सपा में आज भी विश्वकर्मा समाज का दूसरे नंबर का कोई भी नेता नहीं है। उन्होंने कहा की हंसराज विश्वकर्मा को राज्य मंत्री बनने से विश्वकर्मा समाज का बड़ा हिस्सा भाजपा के पक्ष में दिखाई पड़ रहा है। जबकि समाज का मत बड़ी संख्या में विभिन्न दलों में विभाजित है। उन्होंने कहा कि यदि हंसराज विश्वकर्मा के 10 वर्ष के भाजपा अध्यक्ष के कार्यकाल को देखा जाए तो वह विश्वकर्मा समाज के लिए किसी भी प्रकार की उपलब्धि वाला नहीं कहा जा सकता है। उनके मंत्री बनने के बाद समाज इनके कार्यों की समीक्षा करेगा जो आगामी विधानसभा चुनाव पर भरपूर असर डालेगा। उन्होंने कहा की समाज में राजनीतिक जागरूकता और समझ बढ़ी है। समाज सभी को देख रहा है और वह स्वयं फैसला करेगा।




