Varanasi news:नदियों की पर्यावरणीय दुर्दशा के लिए सरकार की नीतियां और भ्रष्टाचार जिम्मेदार: अशोक विश्वकर्मा

वाराणसी

ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने देश की प्रमुख नदियों के प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि नदियों के प्रदूषण और दुर्दशा के लिए केवल औद्योगिक कचरा ही नहीं, बल्कि सरकारी नीतियां और भ्रष्टाचार सीधे तौर पर जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे लचर प्रशासनिक व्यवस्था, भ्रष्टाचार और अपर्याप्त निगरानी तंत्र समान रूप से जिम्मेदार हैं। सरकार की दोषपूर्ण नीतियां और उनका कमजोर क्रियान्वयन नदी संरक्षण को कागजों तक सीमित कर दिया है। नदियों को स्वच्छ करने के लिए एक ओर नमामि गंगे जैसी योजनाएं चलती हैं, वहीं दूसरी तरफ खनन और औद्योगिक विकास की नीतियां नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर रही हैं। उन्होंने कहा की अपर्याप्त सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शहरों का गंदा पानी और सीवेज सीधे नदियों में गिर रहा है। शहरों के विस्तार के अनुपात में पर्याप्त एसटीपी स्थापित करने और उनके संचालन का सटीक अनुमान लगाने में सरकार विफल रही हैं। जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम जैसे कड़े कानून होने के बावजूद, भ्रष्टाचार और लचर निगरानी के कारण उद्योगों का जहरीला रासायनिक कचरा चुपचाप नदियों में छोड़ दिया जाता है। बांधों और बैराजों के निर्माण के समय अक्सर नदियों के पर्यावरणीय प्रवाह को नजरअंदाज किया जाता हैं। जिससे नदियों का प्राकृतिक बहाव रुक जाता है और उनकी स्वयं की-शुद्धिकरण की क्षमता नष्ट हो जाती है। रेत और बजरी खनन के लिए अक्सर पर्यावरण मानकों की अनदेखी की जाती है। खनन की दोषपूर्ण नीतियां नदी के तल को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे जल स्तर गिरता है और जलीय जीव-जंतुओं का पर्यावास नष्ट होता है।नदियों को बचाने के लिए केवल योजनाओं पर भारी बजट खर्च करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए शासन को पर्यावरण-अनुकूल नीतियों का निर्माण करना होगा, जवाबदेही तय करनी होगी, और कानूनों को सख्ती से लागू करना होगा ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।