छात्रों के बीच राहुल की मौजूदगी से सत्ता दल की बेचैनी बढ़ी, अशोक विश्वकर्मा
वाराणसी

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी उत्तर प्रदेश ओबीसी विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा है कि राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम के माध्यम से लगातार छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दे पर बात कर रहे हैं। छात्रों को संबोधित करते हुए वो ना तो किसी दल विशेष तथा किसी व्यक्ति विशेष को बुरा भला कहते हैं। छात्रों के साथ उनका संबोधन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। छात्रों के बीच राहुल की मौजूदगी ने सत्ताधारी दल और उसके ‘थिंक टैंक’ की बेचैनी बढा दी है। राहुल के नेतृत्व में लामबंद होती आवाज़ों को रोकने के लिए ‘जंतर-मंतर’ पर हंगर स्ट्राइक किया गया और देश भर के छात्रों का आह्वान किया गया। ताकि राहुल जैसा व्यक्ति विपक्ष की आवाज़ ना बन सके। मौजूदा सरकार का चरित्र यही रहा है, कि वो विपक्ष भी अपनी मर्जी का चाहती है। इस सरकार को राहुल विपक्ष में भी बर्दाश्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को निष्क्रिय साबित करने के लिए, ‘जंतर-मंतर’ का आंदोलन रचा गया। लेकिन अब स्थिती बदल गई है। दिल्ली में इतनी बड़ी तादाद में भी युवा आंदोलनरत हो सकते हैं, इसकी उम्मीद ‘जंतर-मंतर’ रचने वालो को भी नहीं रही होगी। युवाओं का यह आंदोलन ‘जंतर-मंतर’ रचने वालो के हाथ से निकलता नज़र आ रहा है। सत्ताधारी दल का एजेंडा भी ध्वस्त होता नज़र आ रहा है। अब इन युवाओं को नेतृत्व की ज़रूरत है। वो नेतृत्व ना तो सोनम वांगचुक में नज़र आता है और ना ही ‘कॉकरोचों’ में! अब सवाल है कि वह नेतृत्व कौन करेगा? घूम फिरकर सबकी निगाहें एक ही शख्स पर जाकर रुक जाती हैं, और वह शख्स राहुल गांधी है!




