Varanasi news:रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा, वचन और भाईचारे का पर्व: अशोक विश्वकर्मा

वाराणसी

रक्षाबंधन,भाई बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व, सुरक्षा, वचन व भाईचारे से है गहरा नाता


ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है।इस पर्व का संबंध ऐतिहासिक संकटों में सुरक्षा, वचन और आपसी भाईचारे से भी रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सबसे पहला रक्षा सूत्र (राखी) देवराज इंद्र की पत्नी शची (इंद्राणी) ने अपने पति इंद्र को युद्ध में विजय और रक्षा के लिए बांधा था। वहीं, महाभारत काल में द्रौपदी द्वारा भगवान श्री कृष्ण को उंगली कटने पर अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर बांधने की कथा प्रसिद्ध है। माता लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथ में रक्षा सूत्र बांधकर विष्णु जी को वापस बैकुंठ ले जाने का वचन लिया था।यमुना जी ने मृत्यु के देवता यमराज को राखी बांधी थी, जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने अमरता और रक्षा का वरदान दिया था। मेवाड़ की रानी कर्णावती पर जब गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने आक्रमण किया, तब उन्होंने अपनी रक्षा के लिए मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी थी। हुमायूं ने धर्म की इस मर्यादा का सम्मान किया और मेवाड़ की रक्षा के लिए अपनी सेना भेजी, इसे इतिहास में राखी के सबसे बड़े वचनों में गिना जाता है। नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने हिन्दू और मुस्लिमों के बीच भाईचारा और एकता बनाए रखने के लिए कोलकाता में सामूहिक ‘राखी महोत्सव’ की शुरुआत की थी, जहां लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधी थी। शिशुपाल वध के दौरान भगवान कृष्ण की तर्जनी उंगली कट गई थी और उससे खून बहने लगा था। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की उंगली पर बांध दिया था। तब कृष्ण ने उन्हें आजीवन रक्षा का वचन दिया था, जिसे उन्होंने द्रौपदी चीरहरण के समय निभाया। भगवान विष्णु ने राजा बलि को वचन दिया था कि वे उनके साथ पाताल लोक में रहेंगे। इससे माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं। माता लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथ में रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया और उपहार में भगवान विष्णु को वापस मांग लिया। उन्होंने कहा रक्षाबंधन का पर्व सामाजिक समरसता, सुरक्षा और भाईचारे से गहरा नाता रखने वाला पौराणिक और ऐतिहासिक पर्व है।